अष्टावक्र गीता-१८

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता(हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - यस्य बोधोदये तावत्- स्वप्नवद् भवति भ्रमः। तस्मै सुखैकरूपाय नमः शान्ताय तेजसे॥१८- १॥ अष्टावक्र कहते हैं - जिस बोध…

अष्टावक्र गीता-१७

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता(हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - तेन ज्ञानफलं प्राप्तं योगाभ्यासफलं तथा। तृप्तः स्वच्छेन्द्रियो नित्यं एकाकी रमते तु यः॥१७- १॥ अष्टावक्र कहते हैं - उन्होंने ज्ञान…

अष्टावक्र गीता-१६

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता(हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - आचक्ष्व शृणु वा तात नानाशास्त्राण्यनेकशः। तथापि न तव स्वास्थ्यं सर्वविस्मरणाद् ऋते॥१६- १॥ श्री अष्टावक्र कहते हैं - हे प्रिय,…

अष्टावक्र गीता-१५

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता(हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - यथातथोपदेशेन कृतार्थः सत्त्वबुद्धिमान्। आजीवमपि जिज्ञासुः परस्तत्र विमुह्यति॥१५- १॥ श्रीअष्टावक्र कहते हैं - सात्विक बुद्धि से युक्त मनुष्य साधारण…

अष्टावक्र गीता-१४

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) जनक उवाच - प्रकृत्या शून्यचित्तो यः प्रमादाद् भावभावनः। निद्रितो बोधित इव क्षीण- संस्मरणो हि सः॥१४- १॥ श्रीजनक कहते हैं -…

अष्टावक्र गीता-१३

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) जनक उवाच- अकिंचनभवं स्वास्थ्यं कौपीनत्वेऽपि दुर्लभं। त्यागादाने विहायास्माद- हमासे यथासुखम्॥१३- १॥ श्री जनक कहते हैं - अकिंचन(कुछ अपना न) होने की…

अष्टावक्र गीता-१२

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) जनक उवाच - कायकृत्यासहः पूर्वं ततो वाग्विस्तरासहः। अथ चिन्तासहस्तस्माद् एवमेवाहमास्थितः॥१२- १॥ श्री जनक कहते हैं - पहले मैं शारीरिक कर्मों…

अष्टावक्र गीता-११

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - भावाभावविकारश्च स्वभावादिति निश्चयी। निर्विकारो गतक्लेशः सुखेनैवोपशाम्यति॥११- १॥ श्री अष्टावक्र कहते हैं - भाव(सृष्टि, स्थिति) और अभाव(प्रलय, मृत्यु)…

अष्टावक्र गीता-१०

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - विहाय वैरिणं कामम- र्थं चानर्थसंकुलं। धर्ममप्येतयोर्हेतुं सर्वत्रानादरं कुरु॥१०- १॥ श्री अष्टावक्र कहते हैं -  कामना और अनर्थों के…

अष्टावक्र गीता-९

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - कृताकृते च द्वन्द्वानि कदा शान्तानि कस्य वा। एवं ज्ञात्वेह निर्वेदाद् भव त्यागपरोऽव्रती॥९- १॥ श्री अष्टावक्र कहते हैं…