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मुझे न पद कंचन की चाह | ऋषियोगी | पूरी कविता | शांत मन और नेक कर्म की आध्यात्मिक रचना | हिंदी कविता 2025
मुझे न पद कंचन की चाह,मुझे न ललनायें डहकायें। मुझे न दम्भ, न झूठा मान, न ही भौतिक सुख बहकायें। मुझे चाहिए एक शांत मन, जहाँ सत्य का हो प्रकाश।…