गीता-४

ज्ञानकर्मसंन्यासयोगः ज्ञान कर्मसंन्यास योग Yoga of Knowledge and Renunciation from Action गीता(मूल संस्कृत) गीता (हिंदी भावानुवाद) Gita (English) श्रीभगवानुवाच - इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्।  विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्॥४-१॥ श्री भगवान कहते हैं - पहले…

गीता-३

कर्मयोगः कर्मयोग Yoga of Action गीता(मूल संस्कृत) गीता (हिंदी भावानुवाद) Gita (English) अर्जुन उवाच - ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन।  तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव॥३-१॥ अर्जुन बोले- हे जनार्दन! यदि…

गीता-२

साङ्ख्ययोग साङ्ख्ययोग Yoga Of Knowledge गीता(मूल संस्कृत) गीता (हिंदी भावानुवाद) Gita (English) संजय उवाच - तं तथा कृपयाविष्टमश्रु पूर्णाकुलेक्षणम्‌। विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः॥१॥ संजय बोले- तब करुणा-ग्रस्त और आँसुओं से पूर्ण,…

गीता-१

अर्जुनविषादयोगः अर्जुन विषादयोग Disappointment of Arjun गीता(मूल संस्कृत) गीता (हिंदी भावानुवाद) Gita (English) धृतराष्ट्र उवाच- धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय॥१॥ (सत् और असत् के विवेक रूपी नेत्रों…

अष्टावक्र गीता-२०

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता(हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) जनक उवाच - क्व भूतानि क्व देहो वा क्वेन्द्रियाणि क्व वा मनः। क्व शून्यं क्व च नैराश्यं मत्स्वरूपे निरंजने॥२०-१॥ राजा जनक…

अष्टावक्र गीता-१९

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता(हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) जनक उवाच- तत्त्वविज्ञानसन्दंश- मादाय हृदयोदरात्। नानाविधपरामर्श- शल्योद्धारः कृतो मया॥१९- १॥ राजा जनक कहते हैं - तत्त्व-विज्ञान की चिमटी द्वारा विभिन्न प्रकार…

अष्टावक्र गीता-१८

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता(हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - यस्य बोधोदये तावत्- स्वप्नवद् भवति भ्रमः। तस्मै सुखैकरूपाय नमः शान्ताय तेजसे॥१८- १॥ अष्टावक्र कहते हैं - जिस बोध…

अष्टावक्र गीता-१७

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता(हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - तेन ज्ञानफलं प्राप्तं योगाभ्यासफलं तथा। तृप्तः स्वच्छेन्द्रियो नित्यं एकाकी रमते तु यः॥१७- १॥ अष्टावक्र कहते हैं - उन्होंने ज्ञान…

अष्टावक्र गीता-१६

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता(हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - आचक्ष्व शृणु वा तात नानाशास्त्राण्यनेकशः। तथापि न तव स्वास्थ्यं सर्वविस्मरणाद् ऋते॥१६- १॥ श्री अष्टावक्र कहते हैं - हे प्रिय,…

अष्टावक्र गीता-१५

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता(हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - यथातथोपदेशेन कृतार्थः सत्त्वबुद्धिमान्। आजीवमपि जिज्ञासुः परस्तत्र विमुह्यति॥१५- १॥ श्रीअष्टावक्र कहते हैं - सात्विक बुद्धि से युक्त मनुष्य साधारण…