अध्याय ४-९: यज्ञ का रहस्य

दैवमेवापरे यज्ञं योगिनः पर्युपासते। ब्रह्माग्नावपरे यज्ञं यज्ञेनैवोपजुह्वति।। २५।/ और दूसरे योगीजन देवताओं के पूजनरूप यज्ञ को ही अच्छी प्रकार उपासते हैं अर्थात करते हैं और दूसरे ज्ञानीजन परब्रह्म परमात्मा रूप…

नव निधि रहस्य-भौकाल एवं वास्तविकता

नव-निधियां किसी भी मनुष्य को असामान्य और अलौकिक शक्तियां प्रदान करने में सक्षम हैं। १. पर-काया प्रवेश : किसी अन्य के शरीर में अपनी आत्मा का प्रवेश करवाना पर-काया प्रवेश कहलाता…

सोलह कलाएं-भौकाल एवं वास्तविकता।

सोलह कलाएं कला को अवतारी शक्ति की एक इकाई मानें तो श्रीकृष्ण सोलह कला अवतार माने गए हैं। सोलह कलाओं से युक्त अवतार पूर्ण माना जाता हैं, अवतारों में श्रीकृष्ण…

अष्ट सिद्धि का भौकाल एवं वास्तविकता में फर्क।

अष्ट सिद्धियां वे सिद्धियाँ हैं, जिन्हें प्राप्त कर व्यक्ति किसी भी रूप और देह में वास करने में सक्षम हो सकता है। वह सूक्ष्मता की सीमा पार कर सूक्ष्म से…

हिन्दी में भोजन मंत्र

हिन्दी में भोजन मंत्र,भोजन ग्रहण करनें से पूर्व इसे पढें और ऐसी ही भावना से भरें। उस,भूमि,जल और वायु का मंगल हो।जहाँ यह अन्न उत्पन्न हुआ है। उन किसान और…

तुम और तुम्हारे लोग

मैंनें जब जब असभ्यों से तुम्हारे सत्य को कहनें की कोशिश की, उन्होंनें लकड़ी की लाठियां दिखाकर के मुझे अपमानित कर दिया| मैंनें जब जब सभ्यों से तुम्हारे सत्य को…

मैंनें काव्यरचना नहीं की मगर,काव्यसिक्त हो गया हूँ।

मैंनें जीवन में छंदबद्ध श्लोकों की रचना नहीं की है मगर, नियमित दिनचर्या के पालन से जीवन को छंदबद्ध कर लिया है, मैंनें रसयुक्त श्लोकों की रचना नहीं की है…

धर्म सर्वश्रेष्ठ मंगल है। (कौन सा धर्म?) अहिंसा, संयम और तपरूप धर्म। जिस मनुष्य का मन उक्त धर्म में सदा संलग्न रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं।

धम्म-सूत्र: धम्मो मंगलमुक्किट्ठं, अहिंसा संजमो तवो। देवा वि तं नमंसन्ति, जस्स धम्मे सया मणो ।। धर्म सर्वश्रेष्ठ मंगल है। (कौन सा धर्म?) अहिंसा, संयम और तपरूप धर्म। जिस मनुष्य का मन उक्त धर्म में सदा संलग्न रहता है, उसे देवता भी नमस्कार…