कृष्णाष्टकम्

कृष्णाष्टकम् (मूल संस्कृत) कृष्णाष्टकम् (हिंदी भावानुवाद) Krishnashtakam (English) कृष्णप्रेममयी राधा राधाप्रेममयो हरिः। जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥१॥ श्रीराधारानी श्रीकृष्ण प्रेम से ओत प्रोत हैं और श्रीकृष्ण श्रीराधारानी के प्रेम से। जीवन के नित्य धनस्वरुपश्रीराधाकृष्ण मेरा…

मधुराष्टकम्

मधुराष्टकम् (मूल संस्कृत) मधुराष्टकम् (हिंदी भावानुवाद) Madhurashtakam (English) अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम्। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥१॥ आपके होंठ मधुर हैं, आपका मुख मधुर है,…

श्री सीताजी को पार्वती जी का वरदान

देखन मिस मृग बिहग तरु फिरइ बहोरि बहोरि। निरखि निरखि रघुबीर छबि बाढ़इ प्रीति न थोरि॥234॥ मृग, पक्षी और वृक्षों को देखने के बहाने सीताजी बार-बार घूम जाती हैं और…

श्री सीता-रामजी का पुष्पवाटिका में परस्पर दर्शन

उठे लखनु निसि बिगत सुनि अरुनसिखा धुनि कान। गुर तें पहिलेहिं जगतपति जागे रामु सुजान॥226॥ रात बीतने पर, मुर्गे का शब्द कानों से सुनकर लक्ष्मणजी उठे। जगत के स्वामी सुजान…

शिव, पार्वती और श्रीराम परिकर वंदना

गुर पितु मातु महेस भवानी। प्रनवउँ दीनबंधु दिन दानी॥ सेवक स्वामि सखा सिय पी के। हित निरुपधि सब बिधि तुलसी के॥2॥ श्री महेश और पार्वती को मैं प्रणाम करता हूँ,…

ब्राह्मण-संत वंदना

बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना॥ सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी॥2॥ पहले पृथ्वी के देवता ब्राह्मणों के चरणों की वन्दना करता हूँ, जो…

श्रीराम महिमा

मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥ राम सुस्वामि कुसेवकु मोसो। निज दिसि देखि दयानिधि पोसो॥2॥ वे (श्री रामजी) मेरी (बिगड़ी) सब तरह से सुधार लेंगे, जिनकी…

गुरु वंदना

बंदऊँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥ अमिअ मूरिमय चूरन चारू। समन सकल भव रुज परिवारू॥1॥ मैं गुरु महाराज के चरण कमलों की रज की वन्दना करता हूँ,…

मंगलाचरण

वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥1॥ शब्द, अर्थ समूहों, रसों, छन्दों और मंगलों को करने वाली श्री सरस्वती जी और श्री गणेश जी की मैं वंदना करता हूँ॥1॥ I worship Saraswati (the…

अत्रि स्तुति

अत्रि स्तुति(मूल) अत्रि स्तुति(हिंदी) Atri Stuti (English) नमामि भक्त वत्सलं, कृपालु शील कोमलं। भजामि ते पदांबुजं, अकामिनां स्वधामदं॥१॥ हे भक्त वत्सल, हे कृपालु, हे कोमल स्वभाव वाले, आपको नमस्कार है। निष्काम…