हिन्दी में भोजन मंत्र

हिन्दी में भोजन मंत्र,भोजन ग्रहण करनें से पूर्व इसे पढें और ऐसी ही भावना से भरें। उस,भूमि,जल और वायु का मंगल हो।जहाँ यह अन्न उत्पन्न हुआ है। उन किसान और…

तुम और तुम्हारे लोग

मैंनें जब जब असभ्यों से तुम्हारे सत्य को कहनें की कोशिश की, उन्होंनें लकड़ी की लाठियां दिखाकर के मुझे अपमानित कर दिया| मैंनें जब जब सभ्यों से तुम्हारे सत्य को…

मैंनें काव्यरचना नहीं की मगर,काव्यसिक्त हो गया हूँ।

मैंनें जीवन में छंदबद्ध श्लोकों की रचना नहीं की है मगर, नियमित दिनचर्या के पालन से जीवन को छंदबद्ध कर लिया है, मैंनें रसयुक्त श्लोकों की रचना नहीं की है…

धर्म सर्वश्रेष्ठ मंगल है। (कौन सा धर्म?) अहिंसा, संयम और तपरूप धर्म। जिस मनुष्य का मन उक्त धर्म में सदा संलग्न रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं।

धम्म-सूत्र: धम्मो मंगलमुक्किट्ठं, अहिंसा संजमो तवो। देवा वि तं नमंसन्ति, जस्स धम्मे सया मणो ।। धर्म सर्वश्रेष्ठ मंगल है। (कौन सा धर्म?) अहिंसा, संयम और तपरूप धर्म। जिस मनुष्य का मन उक्त धर्म में सदा संलग्न रहता है, उसे देवता भी नमस्कार…

शिवलिंग: परमभोग का आस्वाद

नहीं राम बिन ठांव-(प्रश्नोंत्तर)-ओशो   प्रवचन-बाहरवां    दिनांक 05 जून सन् 1974 ओशो आश्रम, पूना। शिवलिंग: परमभोग का आस्वाद तो चाहे काम हो, चाहे क्रोध हो, चाहे कोई भी वेग हो, ध्यानी को उसे दूसरे…

पुरुष बलात्कार, शीलभंग, हिंसा आदि अपनी पाशविक प्रवृत्तियों पर काबू पाने में समर्थ क्यों नहीं हो पाता है?

पहला प्रश्न: ओशो, परिवार के भीतर शीलभंग को कैसे निर्मूल किया जाए और कैसे स्त्रियों को उससे लड़ने का बल प्राप्त हो? निंदा शीलभंग करने वाले की की जानी चाहिए,…

तंत्र कहता है कि जीवन की नदी के साथ संघर्ष मत करो, तैरो नहीं; बल्कि उसकी धारा में अपने को छोड़ दो और बहो।

तंत्र कहता है कि जीवन की नदी के साथ संघर्ष मत करो, तैरो नहीं; बल्कि उसकी धारा में अपने को छोड़ दो और बहो। लेकिन अनुभव कहता है कि अति यंत्रीकरण और…

तंत्र सूत्र–विधि -51 (ओशो) काम संबंधि चौथा सूत्र–

बहुत समय बाद किसी मित्र से मिलने पर जो हर्ष होता है, उस हर्ष में लीन होओ।‘’       उस हर्ष में प्रवेश करो और उसके साथ एक हो जाओ। किसी…

तंत्र सूत्र–विधि -50 (ओशो) काम संबंधि तीसरा सूत्र–

‘’काम-आलिंगन के बिना ऐसे मिलन का स्‍मरण करके भी रूपांतरण होगा।‘’   एक बार तुम इसे जान गए तो प्रेम पात्र की, साथी की जरूरत नहीं है। तब तुम कृत्‍य…

तंत्र सूत्र–विधि -49 (ओशो) काम संबंधि दूसरा सूत्र-

‘’ऐसे काम-आलिंगन में जब तुम्‍हारी इंद्रियाँ पत्‍तों की भांति कांपने लगें उस कंपन में प्रवेश करो।‘’      जब प्रेमिका या प्रेमी के साथ ऐसे आलिंगन में, ऐसे प्रगाढ़ मिलन में तुम्‍हारी…