ओशो की ओर से नए साल का संदेश

ओशो, इस नए साल के दिन मानवता के लिए आपका क्या संदेश है? मेरा संदेश सरल है।  मेरा संदेश एक नया आदमी है, होमो नोवस।  मनुष्य की पुरानी अवधारणा या…

कर्णजीवातुभूतम् (कीमिया-ए-इश्क़)

-1- विरञ्चिना विरचिता सुन्दरि! त्वं न सुन्दरी।तथा, यथा मनस्तूल्या मया त्वं सुन्दरीकृता॥ हे सुन्दरी,ब्रह्मा ने भी तुम्हें उतना सुन्दर नहीं बनाया हैजितना कि मैंने अपने मन की कूँची से सँवारकरतुम्हें…

ब्राह्मण का बल क्षमा है क्योंकि वह इस नियम से परिचित है कि जगत को जो भी दो वह अंततः खुद पर ही लौट आता है। बात बात पर श्राप देनें वाले दुर्वासा इसीलिये दुर्वासा हैं, अपनी तपस्या आप ही श्राप देकर भंग करनें वाले। ब्राह्मण आदर्श हैं वशिष्ठ ।

क्षमः यशः क्षमा दानं क्षमः यज्ञः क्षमः दमः।क्षमा हिंसा: क्षमा धर्मः क्षमा चेन्द्रियविग्रहः॥अर्थात्- क्षमा ही यश है क्षमा ही यज्ञ और मनोनिग्रह है ,अहिंसा धर्म है. और इन्द्रियों का संयम…