अष्टावक्र गीता-१४

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) जनक उवाच - प्रकृत्या शून्यचित्तो यः प्रमादाद् भावभावनः। निद्रितो बोधित इव क्षीण- संस्मरणो हि सः॥१४- १॥ श्रीजनक कहते हैं -…

अष्टावक्र गीता-१३

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) जनक उवाच- अकिंचनभवं स्वास्थ्यं कौपीनत्वेऽपि दुर्लभं। त्यागादाने विहायास्माद- हमासे यथासुखम्॥१३- १॥ श्री जनक कहते हैं - अकिंचन(कुछ अपना न) होने की…

अष्टावक्र गीता-१२

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) जनक उवाच - कायकृत्यासहः पूर्वं ततो वाग्विस्तरासहः। अथ चिन्तासहस्तस्माद् एवमेवाहमास्थितः॥१२- १॥ श्री जनक कहते हैं - पहले मैं शारीरिक कर्मों…

अष्टावक्र गीता-११

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - भावाभावविकारश्च स्वभावादिति निश्चयी। निर्विकारो गतक्लेशः सुखेनैवोपशाम्यति॥११- १॥ श्री अष्टावक्र कहते हैं - भाव(सृष्टि, स्थिति) और अभाव(प्रलय, मृत्यु)…

अष्टावक्र गीता-१०

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - विहाय वैरिणं कामम- र्थं चानर्थसंकुलं। धर्ममप्येतयोर्हेतुं सर्वत्रानादरं कुरु॥१०- १॥ श्री अष्टावक्र कहते हैं -  कामना और अनर्थों के…

अष्टावक्र गीता-९

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - कृताकृते च द्वन्द्वानि कदा शान्तानि कस्य वा। एवं ज्ञात्वेह निर्वेदाद् भव त्यागपरोऽव्रती॥९- १॥ श्री अष्टावक्र कहते हैं…

अष्टावक्र गीता-८

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - तदा बन्धो यदा चित्तं किन्चिद् वांछति शोचति। किंचिन् मुंचति गृण्हाति किंचिद् हृष्यति कुप्यति॥८-१॥ श्री अष्टावक्र कहते हैं…

अष्टावक्र गीता-७

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) जनक उवाच - मय्यनंतमहांभोधौ विश्वपोत इतस्ततः। भ्रमति स्वांतवातेन न ममास्त्यसहिष्णुता॥७- १॥ राजा जनक कहते हैं - मुझ अनंत महासागर में विश्व…

अष्टावक्र गीता-६

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - आकाशवदनन्तोऽहं घटवत् प्राकृतं जगत्। इति ज्ञानं तथैतस्य न त्यागो न ग्रहो लयः॥६- १॥ अष्टावक्र कहते हैं -…

अष्टावक्र गीता-५

अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) अष्टावक्र उवाच - न ते संगोऽस्ति केनापि किं शुद्धस्त्यक्तुमिच्छसि। संघातविलयं कुर्वन्- नेवमेव लयं व्रज॥५- १॥ अष्टावक्र कहते हैं - तुम्हारा…