Posted inUncategorized
अष्टावक्र गीता-१४
अष्टावक्र गीता(मूल संस्कृत) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद) Ashtavakra Gita (English) जनक उवाच - प्रकृत्या शून्यचित्तो यः प्रमादाद् भावभावनः। निद्रितो बोधित इव क्षीण- संस्मरणो हि सः॥१४- १॥ श्रीजनक कहते हैं -…