शिव, पार्वती और श्रीराम परिकर वंदना

गुर पितु मातु महेस भवानी। प्रनवउँ दीनबंधु दिन दानी॥ सेवक स्वामि सखा सिय पी के। हित निरुपधि सब बिधि तुलसी के॥2॥ श्री महेश और पार्वती को मैं प्रणाम करता हूँ,…

ब्राह्मण-संत वंदना

बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना॥ सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी॥2॥ पहले पृथ्वी के देवता ब्राह्मणों के चरणों की वन्दना करता हूँ, जो…

श्रीराम महिमा

मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥ राम सुस्वामि कुसेवकु मोसो। निज दिसि देखि दयानिधि पोसो॥2॥ वे (श्री रामजी) मेरी (बिगड़ी) सब तरह से सुधार लेंगे, जिनकी…

गुरु वंदना

बंदऊँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥ अमिअ मूरिमय चूरन चारू। समन सकल भव रुज परिवारू॥1॥ मैं गुरु महाराज के चरण कमलों की रज की वन्दना करता हूँ,…

मंगलाचरण

वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥1॥ शब्द, अर्थ समूहों, रसों, छन्दों और मंगलों को करने वाली श्री सरस्वती जी और श्री गणेश जी की मैं वंदना करता हूँ॥1॥ I worship Saraswati (the…

अत्रि स्तुति

अत्रि स्तुति(मूल) अत्रि स्तुति(हिंदी) Atri Stuti (English) नमामि भक्त वत्सलं, कृपालु शील कोमलं। भजामि ते पदांबुजं, अकामिनां स्वधामदं॥१॥ हे भक्त वत्सल, हे कृपालु, हे कोमल स्वभाव वाले, आपको नमस्कार है। निष्काम…

श्रीराम स्तुति

श्रीराम स्तुति (मूल) श्रीराम स्तुति (हिंदी भावानुवाद) SriRam Stuti (English) श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं। नवकंज-लोचन कंज मुख, कर कंज, पद कंजारुणं॥१॥ हे मन, कृपा करने…

रुद्राष्टकम्

रुद्राष्टकम्(मूल संस्कृत) रुद्राष्टकम्(हिंदी भावानुवाद) Rudrashtakam (English) नमामीशमीशान निर्वाणरूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं। निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं॥१॥ ईशान[स्वामी], ईश्वर, मोक्षस्वरुप, सर्वोपरि, सर्वव्यापक, ब्रह्म और वेदस्वरुप श्रीशिव को नमस्कार है,…

हनुमान चालीसा

हनुमान चालीसा (मूल) हनुमान चालीसा (हिंदी) Hanuman Chalisa (English) श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ…

साधन पंचकम्

साधन पंचकम् (मूल संस्कृत) साधन पंचकम् (हिंदी भावानुवाद) Sadhan Panchakam (English) वेदो नित्यमधीयताम्, तदुदितं कर्म स्वनुष्ठीयतां, तेनेशस्य विधीयताम- पचितिकाम्ये मतिस्त्यज्यताम्। पापौघः परिधूयतां भवसुखे दोषोsनुसंधीयतां, आत्मेच्छा व्यवसीयतां निज गृहात्तूर्णं विनिर्गम्यताम्॥१॥ वेदों…