साहित्य रीता धर्म बिन,
धर्म रीता काव्य बिन,
कोई कृष्ण बुलाया जाये,
मिलन तो इनका कराया जाये,
वैदिक ऋषियों से बिछुड़े हैं,
कालिदास भवभूति दण्डिन,
भारवि भर्तहरि श्री हर्ष को,
वेदपाठ करवाया जाये,
जप तप योग में सनी हुयी,
काव्य पंक्तियां रचे कोई,
सीता का तप तो बहुत गाया,
अब शकुन्तला को गाया जाये,
भोग और योग में हो मिलन,
ऐसा धर्म सिखाया जाये,
कनक कामिनी और विरक्ति,
जनक कोई बुलवाया जाये,
शंकर भाष्य के लंबे चेहरे,
वेद गाम्भीर्य से भरे हुये,
वन से यौवन तक लाया जाये,
शंकर’शंकर”को मिलाया जाये,
साहित्य रीता धर्म बिन,
धर्म रीता काव्य बिन,
कोई कृष्ण बुलाया जाये,
मिलन तो इनका कराया जाये,
‘-आदिशंकराचार्य
“-शिव
SWAMI ASHUTOSH