हिन्दी में भोजन मंत्र,भोजन ग्रहण करनें से पूर्व इसे पढें और ऐसी ही भावना से भरें।
उस,भूमि,जल और वायु का मंगल हो।जहाँ यह अन्न उत्पन्न हुआ है।
उन किसान और मजदूरों का मंगल हो।जिनके प्रयास से यह अन्न उत्पन्न हुआ।
उन व्यापारियों और वाहनों और मंगल हो।जिनके प्रयास से यह अन्न बाजार तक पहुँचा।
उन सेवकों और दुकानदारों का मंगल हो।जिनके प्रयास से यह अन्न मुझ तक पहुँचा।
मेरे माता-पिता का मंगल हो।जिनसे मुझे यह अन्नमय कोष शरीर प्राप्त हुआ।
मेरे माता-पिता अथवा उस संस्था का मंगल हो जहाँ से मैं धन प्राप्त करता हूँ,जिस धन से यह अन्न मुझ तक पहुँचा।
मेरी माँ/पत्नी/बहन एवं अग्नि देवता का मंगल हो।
जिनके द्वारा यह भोजन तैयार हुआ।
मैं उन सबकी मंगल कामना करता हूँ,जो प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से मुझ तक यह भोजन पहुँचानें में सहयोगी हुये।
यह भोजन मेरे लिये मंगलकारी हो।हम उस ईश्वर को हम नमन करते हैं जिनकी कृपा से मुझे यह शरीर और भूख मिली और यह शरीर मेरे लिये ब्रह्म की प्राप्ति में सहायक हो।

🙏🏻स्वामी आशुतोष🙏🏻