अमरूशतकम्-११

सखियों से मान(attitude) की शिक्षा ग्रहण करनें वाली मुग्धा नायिका अपने मान का अर्थ बता रही है

मैनें उनके सामनें आते ही मुख नीचे कर लिया(और जब आँखे उन्हे देखनें के लिये आकुल होनें लगीं तो),आँखों को अपने पैरों में गड़ा दिया,उनकी वाणी सुननें की उत्कण्ठा से आकुल कानों को बंद कर लिया,कपोंलों पर उभरे हुये रोमांचो और झलकते हुये स्वेद विन्दुओं को हाथों से ढक लिया किन्तु यह अँगिया तो मसक मसक कर जोड़ों पर खुलती ही जा रही है,अब तुम्हीं बताओ मैं क्या करूँ ।।११।।अमरूशतकम्

सखीभिर्मानं शिक्षितापि कृतप्रियसंगमा काचिन्नायिका ता: प्रति प्राह

तद्वक्त्राभिमुखं मुखं विनमितं दृष्टि: कृता पादयोस्तस्यालापकुतूहलाकुलतरे श्रोते निरूद्धे मया।

पाणिभ्यां तिरस्कृत: सपुलक: स्वेदोद्रमो गणडयो:

सख्य:! किं करवाणि यान्ति शतधा यत्कन्चुके संधय:।।११।।अमरूशतकम्

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *