अमरूशतकम्-९

कवि अधीरा प्रगल्भा नायिका और शठ नायक के व्यापारों का वर्णन करता हुआ कहता है–

“सायंकाल क्रोध से भरी नायिका चंचल तथा कोमल बाहुपाश से पति को भलीभाँति बाँध कर क्रीडामन्दिर में सखियों के सामनें ले आया और ‘फिर ऐसा करोगे’ इस प्रकार काँपती हुयी कोमल मृदुवाणी से उसके बुरे कार्यों की सूचना देकर रोती हुयी ‘न’ ‘न’ करके अपना दोष छिपाने के लिये हँसते हुये सौभाग्यशाली नायक को(लीलाकमल से) पीटनें लगी ।”

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