नायक द्वारा सिखा कर भेजी गयी सखी मान(attitude)छोड़ देनें के लिये नायिका को डरा रही है-
“रे कोपने,इस प्रकार उंगलियों के नख से आँसुओं की बूँदों को टुकड़े-टुकड़े करती हुयी तुम धीरे धीरे क्यों रो रही हो|यदि दुष्टों के वचनों को मान कर मान(attitude) तथा क्रोध करनें में अति कर दिया तो तुम्हारा प्रिय इससे इतना खिन्न हो जायेगा कि फिर तुम्हारे अनुनय की भी उपेक्षा कर बैठेगा जिससे तुम्हें चिल्ला चिल्ला कर बहुत रोना पड़ेगा !”