एक छोटा सा संदेश जिसे कोर्ट द्वारा तो समाधान कर दिया गया है लेकिन हमारी पुरानी आदतों के ना बदलनें के कारण अनेंक समस्याओं की जननी हो गयी है।
आदतें बदलें क्यूँकि देश बदल गया है। संविधान का राज है। महिलायें भी बराबरी की हकदार हैं।
1-पुरानें समय में कन्यादान किया जाता था आजकल दामाद गोद ले लिये जाते हैं,जिन्दगी भर दामाद वही करेगा जो लड़की और सास ससुर कहेंगे।
2-दामाद लोगों को भी कहना चाहिये कि लड़की के पिता की आधी सम्पत्ति उसकी भी है राजी से दे रहे तो ठीक नहीं तो कोर्ट से मंजूर करा लेंगे।
3-कुँवारे लडकों को शादी से पहले ही लड़की के माता-पिता और भाई को समझा देना चाहिये कि बाबूजी कन्यादान के जमानें चले गये,अब बराबरी का हक है।
महिला सशक्तीकरण हो गया ,हो गया।
अब भारतवर्ष में ना कोई स्त्री दहेज के लिये मारी जायेगी कूटी जायेगी और ना ही फाँसी पर चढाई जायेगी और बहुत संभव है कि भविष्य में ना तलाक होंगे, ना तीन तलाक और ना ही हिन्दू वाले और ना ही कोई हिन्दू और मुस्लिम के नाम पर कनवर्जन होंगे , अरे कुँवारों ! राम का मंदिर क्या बन रहा है भारत में राम राज्य ही आ गया है। अब सीता सहित चार पुत्रियों के पिता यह ना कह सकेंगे हाय ! हमारा कोई पुत्र नहीं है। अब उनके चार पुत्र भी होंगें और चार पुत्रियाँ भी।
बस यही रामराज्य में जैसे विवाह से पहले कन्यादान किया जाता था बस यही दान करवा लीजिये जनक जी से शादी से पहले ही।
1-कुँवारे लड़कों को शादी से पहले ही लड़की के पिता की आधी संपत्ति घर मकान गाड़ी खेती सब लड़की के नाम करा लेनी चाहिये सभी भाई-बहन में बराबर ।
2- लड़की से कह देना चाहिये कि हमें दहेज नहीं चाहिये एक रुपया भी लेकिन अगर गड़बड की तो उस दिन आप इस संपदा के साथ स्वतंत्र हैं।