
बारबार अनुनय करनें पर भी मानत्याग न करनें वाली माननी से सखी कह रही है-
“हे कठिन हृदये! देख,बाहर तुम्हारा प्रियतम सिर झुकाये धरती कुरेद रहा है,सखियाँ बिना खाये पिये पड़ी हैं और रोते रोते उनकी आँखें सूज गयी हैं,पिंजरे के तोते नें हँसना पढ़ना सब कुछ छोड़ दिया है किन्तु(यह सब देख सुनकर भी)अभी तक तुम्हारी यह दशा है! इसलिये अब भी तो मान करना छोड़ दो ।”