अमरूशतकम्-२

परकीय-गमन को भाँप जानें वाली नायिका जिस प्रकार शठ नायक के हाथ पकड़नें पर उसे झटक देती है,आंचल पकड़नें पर उसे बलपूर्वक लीलाकमल से पीटने लगती है,केश पकड़नें पर उसे ढकेल देती है,पैरों पर पड़नें पर उसे देखती भी नहीं,और आलिंगन करनें पर उसे दूर ठेल देती है उसी प्रकार त्रिपुर दाह के समय अश्रुपूर्ण नेत्र कमलों वाली त्रिपुरसुंदरियों नें शंभु के वाणों से उत्पन्न अग्नि को हाथ से लगनें पर झटक दिया,आंचल पर लगनें से उसे करकमलों से थपथपा दिया,केशों में लगनें से उसे मसल दिया,पैरों पर लगनें से उसे देखा भी नहीं और शरीर पर लगनें पर उसे झाड़ दिया | इस प्रकार लीला करनें वाला शंभु के वाणों से उत्पन्न अग्नि तुम्हारे दुखें को भस्म करे।

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